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Monday, 2 December 2019

पक्कू इलाज



बलात्कारियों यनु इलाज ह्वेगी जरूरी
फेर नि रैलू  बांस  नि बजैली   बाँसुरी

एक दां सच्चा मर्द बणै कि  दिखावा
बीच बिचा मा रोणे तै नीति  छवाड़ा
ख्वला तै न्याय देवी आँख्यों की पट्टी
दिखी जैलू कख साफ ,  कख छ टट्टी

संसदा दिदों, यनु इलाजै द्यावा मंजूरी
फेर नि रैलू  बांस  नि बजैली   बाँसुरी

बल यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
इन मा कनै ह्वली पूजा कख बे आला द्यबता
दुशासन घुमणा सड़क्यों पुन डौर लगीं भारी
वीर लक्ष्मीबाई देशे नारी तैं न बणावा बिचारी।

यूँ कि झगड़े जड़ कटणों द्यवा मंजूरी
फेर   नि  रैलू बांस नि बजैली बाँसुरी

यखक  मर्दोंन  नारी  इज्जते  वास्ता  लंका  जलै
घौरे आबरू पे हाथ डालण वालूँ तैं महाभारत रचै
लोकतंत्र  का  ये  कानूनsल  कन  किन्नर  बणायी
शिखण्डी  दयेखि  सब भीष्मोंळ  हथ्यार  धैर्याली

अब मूमबत्ती नि चिता जगोणे द्यवा मंजूरी
फेर   नि  रैलू  बांस   नि   बजैली  बाँसुरी ।

@ बलबीर राणा 'अड़िग'

Thursday, 7 November 2019

खुद



जैतें खुद् नि, वा खुद ही नि छ
या त कुर्च-बुर्च छ या वेसुद छ

खुद छ त सुदबुध छ, जी जमाण छ
खुद नि ढुंग छ  या बुद्ध भगवान  छ
खुद मा खुद होंण धर्ती कु पर्वाण छ
खुद मा खुद नि शून्य छ आसमान छ

खुद मा खुद् छ त मनखि माणि च्वोळा छ
खुद  नि  त झाड़ी/पौंछि पिस्यों  थौला  छ
खुद छ त  जीवन छलबळ सौंण  भादो  छ
बिगैर खुदो मनखि, ठडयों  म्वळो मादो  छ

कंयारी  छै  वा  मयाळी  छै, जर्रा  नखर्यळी  छै
सब्योंक सामणि नि ओंदी वा तति शर्मयाळी छै
क्वांसिली छै वा यकुली लुकि-लुकी रुवोन्दी छै
माँ  माटी की  पीड़ा वा  औंशू दगड़  बगांदी  छै

खुदs कोंकळी कळामळी मायो उलार छ
जिकुड़ी उबलणु ज्वालामुखी भभकार छ
खुदs यादों कुट्यरि ज्यू पांजी  संमोण छ
हर्यों भर्यों बण मा खुदेड़ हिलांसे भौंण छ

खुद होण से खुदs, भिज्यां पिड़ाण्दी/बिणादी छै
क्या बाळो क्या  ज्वान, बुड्यों तलक  बिथांदी छै
ये खुदे क्वी उमर नि सब्योंक सांका पड़ी जांदी छै
खुद  कु  एसास  दिलोंदी  अपणुपन  बिगांदी  छै।

कुर्च-बुर्च - बुरी तरह से टूटयों
पर्वाण - सक्षम
पिस्यों - आटे का
क्वांसिली - कोमल, भावुक

@ बलबीर राणा 'अड़िग'



Saturday, 12 October 2019

मनसा


मन मा कबि कबि
स्वचणों छ कि
माया/पिरेमा बिगैर
अपणैस से दूर
यकुलांस का दगड़
जीवन जात्रा करि जावो
फर ज्यू तौं रुखड़ा बाटों का
कांडा कण्डालीss  दयेखि
झझराणों छ किले ?
वा बुद्ध अर ध्रुव
मनखि नि छाँ क्या?

@ बलबीर राणा 'अड़िग'



Tuesday, 8 October 2019

बोला तुम मा आज, राम क्वो छ




अधरम पे धर्में विजय ह्वेन
राम लाम बटिन घोर बौड़ी ऐन
फेर रामराज्य सुरु
यनु रामराज्य
जैन *सर्वेभवन्तु सुखिनः*
*सर्वे संतु निरामया:* मंत्र दिनी
क्या मनखि क्या जीव नमाण
सब्बी सुख दुःख एक समान
यनु जीवन दयेखि परलोक बटिन
रावण तैं बी संतोष ह्वे कि
चलो मेरा पापाs बाना धर्ती पर
मनखी और मन्ख्यात को जलम ह्वे
पर आज !!
रावण खूब खुस होणु,  खिलपत ह्वे हैंसणु
कि वे युग मा त रामल कैका
ज्यू मा मैं तैं नि बसण द्य्यायी
पर आज कलजुग का हर मनखी अपणी
आत्मा तक मैं तैं जगह दियाली
वा, होर जोर से ठहाका लगाणु
हमारी बुद्धि पर, विवेक पर, धर्म पर कर्म पर
भैर भैर राम, भितर मि रावण विराजमान
अरे ! साल मा एक बार क्या
हर दिन तुम मेरु पुतोळु जगावा
मैं फर क्वी फर्क नि पड्द
पुतोळ असली आदिम होन्दू क्या ?
हा हा हा ह ह........
अरे ! भुलाओ यनु बतावाss
 कि !
तुमु मा आज राम क्वो च ?
मंत्री या संतरी
अधिकारी या चपडैस
दुकानदार या ठ्यकदार
जमदार या गलेदार
उधोगपति या प्रधानपति
धरमगुरु या बामण ज्यू
बिठ या दलित
रणनीतिकार या पत्रकार
छ रे क्वी राम ? बोलाss
नाss, नs ?
तो सच्चे स्वीकार कण मा क्यांकि सरम्
कि,
भैर रामों नौं
भितर मेरा कामां सौं ।

@ बलबीर राणा 'अड़िग'





Monday, 7 October 2019

गद्दाग्वोळी

भुयाँ त रिंगरिट्वळी हुयीं
टक लगे अगास द्यखणु छौं
छुयूँ छुयूँ मा टुकु पौंछिग्यां
यूं छुयूँ मिजात बिंगणु छौं 

धुँवां रौळी मचायीं सर्रा पृथी
भैजी मुठ्ठी मुठ्योंळ उर्याणु छौं
क्व टपकाणु कख बे टपकणु
ऐरां चैतु काका तनि टपराणु छौं

अयां पोरों दां वाळा बी, छुयों ल्यैकी
तौन बी छुयूँ छुयूँ मा ही, मळकैनी
पांच साल तलक छुवीं भकौरणा रयाँ
हमुन छवीं बिंगैन वोंन छवीं क़ुर्च्यनी

भुलाs नोना भुखै पातणे रय्यां
खंतणो बिगैर नांगे नाचणे रय्यां
दिदाs नोनोsक उगत्याट् घबग्याट
सीं छुयूँ सुणी हवा मा उड़णा रय्यां

अब न पच्यैणु न उन्द उब होणु
एक गद्दाग्वोळी चिताणु छौं
कु जागे पीड़ा जिठाणु बैद हुयूँ
अपणा बल्दे जन मार सौंणु छौं
छुयों कु संगति बजार लग्यों
छुयोंक मोल भौ छुयों मा हौणु
कन लूटमार मचीं यूं छुयों की
जु पाळी बांधी वी गैना कटु हौणु

छुयूँ की बाखरी छुयूँ कचम्वळी
जब चावा तब बणावा
अंगुल्यों का टच मा सरो व्योपार
डिजिटल पुज्ये जबैर बी मनावा।

गद्दागवोळी = पेट की अवस्था जब अपच
में न नीचे होता है न ऊपर
@ बलबीर राणा 'अड़िग'

Friday, 27 September 2019

द्वगुण ब्याज



बाटा पुन मितैं आज
अँज्वाळ भरि बगत मिली
जु द्खण मा तऽ माया जन छै
फरऽऽ  ज्या बी ह्वो,
त्वे मा सौंपणु  बी छौं 
अर
त्यारा ज्यु मा इन्वेस्ट बी कनु छौं
जर्वत पड़लीऽ  त
द्वगुण ब्याज दगड
दियां लेऽऽ।


@ बलबीर राणा 'अडिग'

Sunday, 8 September 2019

छवीं बण जैलो त तब क्या ह्वोलो


पंयांरी पराणी ह्योन्द एलो त तब क्या ह्वलु
भ्वोळ यनु बुग्याल नि मिली त तब क्या ह्वलु

यति अलगस ठिक नि जरा हथ खुट्टा हिलोवुं दों
रेस बणि दुन्यां दौड़ण पड़लो त तब क्या ह्वलु

भिंडी आदत न डाळ रंगीला बसंत नचणे की
रूड़ियों मा निभोण पड़लो त तब क्या ह्वलु

तति रंगमत न ह्वो मिळणे मिठी भौंण पुर्योंणे मा
विरह गीत गाणे नोबत एग्ये त तब क्या ह्वलु

सगोर सीख जरा छव्ट्टा/म्वटा गदरा तरणों कु
अचाणचक असाढ़े गाड़ एग्ये त तब क्या ह्वलु

अबी त चखळ/पखळ छ लेणों जोग जु लग्यों
भ्वोळ बैला/बंठर ही रैग्यां त तब क्या ह्वलु।

फिकर न कैर छवीं की, छविंल त लगणे ही छ
छुयों का चकर मा छवीं बण जैलो त तब क्या ह्वलु।

@ बलबीर राणा 'अड़िग'