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Tuesday, 12 November 2024

ईगास बग्वाळ : माधो सिंह भंडारी



हे उत्तराखंडी नै नवांणों इतियास तुमतैं बताणु छौ

देवभूमि का वे युग पुरुष की  गाथा सुणाणु छौ।

पंद्रह सौ नब्बे दशक मा एक वीर पैदा ह्वेनी
वीर सौंणबाग भंडारी का घौर वेन जलम लीनी
जैsकी गाथा जुग बटि ये गढ़भुमी मा गुंजणी रै
वीरभड़ माधो सिंह भंडारी नाम से वा अजर अमर ह्ववे।

वे युगपुरुष की तागत को ऐसास तुमततैं कराणु  छौ
हे उत्तराखंड .........

बाळापण से उटंगरी रयी वा होंणहार चतुरछंट छौ
लौंची उमर मा यी गढ़सेना कु सिपै बणिगे छौ
वीर क्या वा भड़ क्या एक महारणपति छायो
गढ़ नरेश महीपति शाह को शूर सेनापति ह्वायो।

एक महानायक सेनाध्यक्ष की वीरता तुमतैं बताणु छौ
हे उत्तराखंड .......

ज्वान मा को ज्वान छौ वा दौफरी कु भड़ांग छौ
आगौ जनु भभकार छौ वा, उदमातो फौन्दार छौ
अपणी जलमभूमि का खातिर कत्गा लड़ै तेन लड़ीनी
कति दुश्मनौं का मुंड मोड़ीनी,कत्गों की धौंड़ धड़केनी।

यना वीर की वीर गाथा तुमतैं मि बिगाणु छौ
हे गढ़भूमि का नैनवाणो......

मालों का वे महाकालन, हूण दापों का छक्का छौड़ीनी
भारत चीन बोर्डर तैन वोड़ा मुँडरा गाड़ीनी
पाड़ौ पुटुग सुरंग बणाण वळू दुन्यां कु पैलु इंजीनियर ह्वायू
अपणा लड़ीकौ  बलिदान करि वा पाणी कूल बगै ल्यायौ।

यना परोपकारी मणखी कु सत तुमततैं समझाणु छौ
हे उत्तराखंड का .......

थाती माटी का खातिर यनु भगिरथ काम करिगे वा
जन्मजमान्तरा वास्ता मलेथा को उद्दार करिगे वा
एक सिंह बण को, एक सिंह गाय को
एक सिंह माधो सिंह, हैकू सिंह काहे को

इना महाशेर कु शूरत्व आज तुम खुणैं दिखाणू छौ
हे उत्तराखंड का ......

मणखी छौ वा अनमणमाथी को राणियों को रौंसिया छौ
अपणों का खातिर मयाळू मायादार फूलों को हौंसिया छौ
एक बार विजय रथ तौंकु छवटा चीन तलक गैनी
निर्भगी बीमरी लगी जु सदानी तैं घौर बौड़ी नि ऐनी।

मृत्यु शय्या पर बैठ्यां तै पुरूष की रणनीति तुमतैं बताणु छौ
हे उत्तराखंड का.....

साहसी निडर तै भड़न,आखरी दों सिपैयों तैं समझायी
मेरा म्वने खबर दुश्मनो  थैं पता न लगण दयायी
निथर तुम एक भी ज्वान घौर र बौड़ी नि जाला
दुश्मन थैं पता चलि त तुमतैं यखी लमडे दयला।

वे गढ़भूमि का रणबांकुरै आखरी ख्वाइस बिंगाणु छौं
हे उत्तराखंड का.....

लड़णै रय्याँ पिछने हटणू रय्यां फिर घौर बौडी जयां तुम
मेरा शरील तैं त्यौल मा लपोड़ी हरिद्वार मा जगे दियां तुम।
यीं बीर गाथा कु परमाण इतियास हमूतैं बतौंदा
त्याग समर्पण की मिशाल आज मलेथा की खुशाली समझौंदा।

देवथाती का वीं युग पुरुष की प्रेरणा तुमतैं सुझाणु छौ
हे उत्तराखंड का .....

लोक गाथा पंवाणों मा तै वीर की कथा औंदी
बग्वाळ मा नि पौंछी सु त गढ़वाळन बग्वाळ नि मनेनी
इग्यारा दिन मा जब वा भड़ लाम बटे घौर बोड़ी ह्वेनी
तब गढ़ देशन बगछट ह्वे बग्वाळ मनेनी।

अपणा सपूत का खातर लोगों की श्रद्धा बताणू छौ
हे उत्तराखंड का.....


*** वे समै मा मलेथा कु लोक व्यवहार***

बारा बित्या मास अर छई ऋतु चली गैनी
बारा ऐनी भेलो बग्वाली सोला शरद पूरा ह्वेनि
सब्बि ऐना घौर बौड़ी की, मेरु माधो किले नि ऐनी।


करुणा कनि रे राणी बौराणी, धरती पछाड़ खाणी रैनी
हिन्क्वाण पड़ी रौ गौं ख़्वाळो, हाथ क्वी धाणी नि लगीं
सब्बि ऐना घौर बौड़ी की, मेरु माधो किलै नि आयी

चौंल छड़याँ का छड़याँ रैग्यां दाल दौलीं की दौळी रै ग्यायी
ऊनि रैग्ये बासमती च्यूड़ा, थौला कांकर टंग्यां रैनी
सब्बि ऐना घौर बौड़ी की, मेरु माधो किले नि ऐनी।

हे मेरा नै नवाणों यू छै बीरभड़ माधो कि कथा
स्वोना आंखरों से लिख्यों  रैलू वे पुरुष की शौर्य गाथा ।

@ बलबीर राणा 'अड़िग'

संकलन सभार:-
हरिकृष्ण रतूड़ी रचित और श्री डॉ यशवंत सिंह कटौच द्वारा संपादित एवं संशोधित गढ़वाल का इतिहास, डॉ बीरेंद्र सिंह बर्तवाल रचित गढ़वाली गाथाओं में लोक और देवता और डॉ नंदकिशोर हटवाल जी के ग्रंथ चांचडी झुमाको से। 

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