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Sunday, 22 March 2026

कविता

 कविता बथौं जनि

दिखेन्दी नि,

बस मैसूस होन्दि

कब्बी ठंडी सुरसुर्या

कब्बी टटगार ह्यूं साड़

कब्बी ताति तौळाबोळ लू,

फेर

शब्द पकड़दी

कागज मा बिखदरी

कैका हिया बैठदी

कैका हिया उठदी

अर, कै उणि बल

माळा गोरू धौळे-धौळ।


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