लौंची उमर मा
ब्वौड़
जत्गा भी गेळ/पड़गोल
क्ले नि रे ह्वोलु
बल्द बणि
खेंचम-खैंच कु हल्या बणि जान्द
सैद यु जीवनक सच च।
@ बलबीर राणा 'अडिग'
धर्ती पर जीवन संघर्षों वास्ता च, आराम त यख बटिन जाणा बाद, ना चै किन बी कन पड़ल, ये वास्ता लग्यां रावा, जत्गा देह घिस्येली उत्गा चमक, उत्गा संचय जु यख छुटलू। @ बलबीर राणा 'अडिग'
लौंची उमर मा
ब्वौड़
जत्गा भी गेळ/पड़गोल
क्ले नि रे ह्वोलु
बल्द बणि
खेंचम-खैंच कु हल्या बणि जान्द
सैद यु जीवनक सच च।
@ बलबीर राणा 'अडिग'
कुल्याडु ल्येकी कख जाणु रे
कै मुल्क कु तु कसाई रे
अपणा त क्वे नि इन निर्दयी
तु जरूर सरकार को पाल्यों रे
हाथ लगे देख जरा अजमाईस कर
हाथ टंगडा तोड़ी द्योला तेरा रे
भाज अपणी डोफलि टोफुलि ल्येकी
पिछने मुडिक ना द्येख रे
यु डाला मेरा आस छन
औलाद भी यु ही रे
हाथ लगे दिखो जरा
तेरी फिर खैरी नि च रे
मेरी अंग्वाल मेरा भोल पर
धरती की यु धरोहर रे ।
चिपका छोरों दीदी भुल्यों
चिपका बैख नमाण रे
डाला कटला या हम कटला
यूँ कु सास देखला रे।
रचना: बलबीर राणा अडिग"
ऐगे वा होरी
याद कंठ-कंठ तक भोरी भोरी
ज्यु मां उमाल च
मन मां उलार च
कै मां डालुला रंग
कु आलो संग
जौला देली- देली
भटकुला मोरी- मोरी
गीत लगौला
प्रीतक अंग्वाल भरुला
पर !
वु बाळापन अब नि रायी
ना माया को वु जमानु रायी
भटकणु छै यु पराण आज भी
गौं गल्यों धोरा आज भी
जख होरी का नबाब बणि
बक्सट बण्यां रैन्दा जणि
ब्वे व्यखुन्दा मुंड पलासी
दैन्दी छै होरी तें गाळी।
@बलबीर राणा 'अडिग'
किताब मा लिख्यां आँखर त मिऽटी जान्दा
भाग मा लिख्यां नि मिटदा
किताब त क्वी भी लिख सकदा भुला
जोग त्वेन अपणु खुद लिखण भुला
किले बिबलाट कनु मेरू प्यारू भुला
कुसंगति लोभ मा न भाग मेरू भुला
किले मन अपणु भरमान्दू भुला
चकबंदी मंत्र तें विंगी जा मेरा भुला
समझी मेरु भुला
विंगी जा तु भुला........
देव भूमि मां जन्म मिलदू कै जतन का बाद
ये तें अर्खाद ना जाण दे हे भूलाऽऽऽऽऽऽ.... आज
हरि भरि ये भूमि तें बांजा ना बणण दयावा
बाप दादों की थाती तें खाली हूँण से बचावा
जड़ जंगल जमीन की लडे छिन भुला
सचु गढ़ पुत्र छै त लड़ जा मेरु भुला
रोजगारक रुण अब तु ना रोवू भुला
अपणु रोजगार अफुं बण जा मेरु भुला
रोजगार बण जा मेरु भुला........
रोजगार बण जा तु भुला
माफियों कु जंगल राज कब तलक रैलू
राजनीति ठ्यकदारोंक हाथ कब तलक ठगण रैलू
गरीब क्रांति मिशन कुणी चौक-चौका पोंछावा
विकासक रांकों थामी घर-घर उज्यालू करि जावा
गणेश भैजी स्वेणा तें साकार कर भुला
इकुलांस हुन्य्याँ पाड़ तें उदंकार कर भुला
ये धरती को भुम्याल छै तु रक्षा कर भुला
पाडे कि पाणी-ज्वानी समाल मेरु हूला
समाल मेरु भुला
रक्षा करि जा मेरु भुला .....
किले बिबलाट कनु मेरू प्यारू भुला
कुसंगति लोभ मा न भाग मेरू भुला
भाग मेरू भुला .....
भाग मेरू भुला ....
गीतकार :- बलबीर राणा “अडिग”
ये ज्योत तें बुजण ना दियां
गरीब का स्वेणा टूटण ना दियां
लक दक फूल पाती से सजलु मेरु मुल्क
चकबंदी की सबत बिसरी ना जयां।
कमर कसि ल्या रैबार सुणी ल्या
नेता थोकदार गल्दार भैजी तुम भी सुण ल्या
भाषणों घोषणाओं से अब ज्यु उबिगे
तुम भी बंग्लो से भैर ऐ ल्या।
हिमालय की शान गढ़ कुमौं
देवी द्यब्तों कु थान गढ़ कुमौं
धरती पुत्र छाँ तुम ये धरती का
उत्तराखंड की पच्छ्याँण गढ़ कुमौं।
गणेश भैजी मंगल मंत्र हाथ धरि
घुमणु देली- मोर गौं ख्वाला फिरी- फीरि
अपणु आज हमारा भ्वोल् तें
ख्वज्याणु चकबंदी का बाटा फरि।
बात नि यु विचार नि
क्वी आँखरों कु जाल नि
ये बाटा ही ये मुल्क का पराण बच् सकदा
दिल्ली देहरादून की बात नि।
ना भटका दिन रात नौकरी का बाना
अठ्ठारह घंटा द्वी रोटी का बाना
ये धररती कु बर्चस्व तब्बि बच्युं रैलु
घर बौड़ण कु तुम संकल्प ल्याला।
@ बलबीर राणा 'अडिग'
गरीब क्रांति अभियान
किताब मा लिख्यां आँखर त मिऽटी जान्दा
भाग मा लिख्यां नि मिटदा
किताब त क्वी भी लिख सकदा भुला
जोग त्वेन अपणु खुद लिखण भुला
किले बिबलाट कनु मेरू प्यारू भुला
कुसंगति लोभ मा न भाग मेरू भुला
किले मन अपणु भरमान्दू भुला
चकबंदी मंत्र तें विंगी जा मेरा भुला
समझी मेरु भुला
विंगी जा तु भुला........
देव भूमि मां जन्म मिलदू कै जतन का बाद
ये तें अर्खाद ना जाण दे हे भूलाऽऽऽऽऽऽ.... आज
हरि भरि ये भूमि तें बांजा ना बणण दयावा
बाप दादों की थाती तें खाली हूँण से बचावा
जड़ जंगल जमीन की लडे छिन भुला
सचु गढ़ पुत्र छै त लड़ जा मेरु भुला
रोजगारक रुण अब तु ना रोवू भुला
अपणु रोजगार अफुं बण जा मेरु भुला
रोजगार बण जा मेरु भुला........
रोजगार बण जा तु भुला
माफियों कु जंगल राज कब तलक रैलू
राजनीति ठ्यकदारोंक हाथ कब तलक ठगण रैलू
गरीब क्रांति मिशन कुणी चौक-चौका पोंछावा
विकासक रांकों थामी घर-घर उज्यालू करि जावा
गणेश भैजी स्वेणा तें साकार कर भुला
इकुलांस हुन्य्याँ पाड़ तें उदंकार कर भुला
ये धरती को भुम्याल छै तु रक्षा कर भुला
पाडे कि पाणी-ज्वानी समाल मेरु हूला
समाल मेरु भुला
रक्षा करि जा मेरु भुला .....
किले बिबलाट कनु मेरू प्यारू भुला
कुसंगति लोभ मा न भाग मेरू भुला
भाग मेरू भुला .....
भाग मेरू भुला ....
गीतकार :- बलबीर राणा “अडिग”
15 जनवरी 2013