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Monday, 9 February 2026

आँख बंद कौरि नि पै सकदन अंधै नजर

आँख बंद कौरि 
नि पै सकदन 
अंधै नजर 
जैका झफ्फक्वळि दूरी पर छ पूरी नजरै दूरी। 

 फजल झुकमुक अँध्यारा मा 
खग्रास घामो उदै होन्दू 
अर 
अँध्यारा मा एक हौरि घणो अँध्यारौ फ़ैल जांद, 
जुन्यळि पर जादा काळा धब्बा होला जूनी अर गैणो का। 

 झफ्फक्वळि लगै ही 
जाणि सकदन धार (क्षितिज)  तैं 
नजरा बोम तैं 
 कि 
सु कै आळा मा धर्रयूँ होलू 
अगर 
धर्रयूँ बि त 
कै अँध्यारा खूँटा पर टंग्यूँ 
कै नक्षत्रौ अँध्यारो। 

 आँख बंद कोरि द्योखण 
अंधा जनु द्योखण नि। 

 कै डाळा छैल मा 
कै सड़का किनारा घिमसाण घ्याळा बीच 
कुर्सी बुणदो एक अंधा 
दुन्यां दगड़ सबसे जादा पिरेम करदूं 
सु झफ्फक्वळि मा कुछ दुन्यां तैं स्पर्श करदूं 
अर 
भौत दुन्यां तैं स्पर्श कन चांन्दो। 

@ विनोद कुमार शुक्ल 
Anuwad :  बलबीर राणा 'अडिग'

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