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Monday, 9 February 2026

सजल

हर काम मा शरीलौ रगड़ा किलै करे जौं, 
सौ-सल्ला मा होंणू त, झगड़ा किलै करे जौं।

 जब वूं थैं ही नि हमारी क्वी परवा-फिकर, 
 त वूंकि चिंता मा तौळाबोळि किलै करे जौं। 

 दूर रैकि हि सब्बि निभैणू छ सौजि सजिलो, 
फेर नजीका वास्ता फबत्याट किलै करे जौं। 

 इथगा गनीमत कम नि कि हम बैरि नि छन, 
पर खासमखास होणू कबत्याट किलै करे जौं। 

 एकि गळज्यू पाणी दोस्ती ख़तरनाक होंदी बल, 
त गळज्यू बणे दगड़यूळ तैं खतरा किलै करे जौं। 

 अडिग जब मर्जिल नि होणू मन मर्जी कु काम, 
 फेर हैका कि मर्जी तैं, मर्जिल किलै करे जौं। 

 1 फ़रवरी 26 

 @ बलबीर राणा 'अडिग'

आँख बंद कौरि नि पै सकदन अंधै नजर

आँख बंद कौरि 
नि पै सकदन 
अंधै नजर 
जैका झफ्फक्वळि दूरी पर छ पूरी नजरै दूरी। 

 फजल झुकमुक अँध्यारा मा 
खग्रास घामो उदै होन्दू 
अर 
अँध्यारा मा एक हौरि घणो अँध्यारौ फ़ैल जांद, 
जुन्यळि पर जादा काळा धब्बा होला जूनी अर गैणो का। 

 झफ्फक्वळि लगै ही 
जाणि सकदन धार (क्षितिज)  तैं 
नजरा बोम तैं 
 कि 
सु कै आळा मा धर्रयूँ होलू 
अगर 
धर्रयूँ बि त 
कै अँध्यारा खूँटा पर टंग्यूँ 
कै नक्षत्रौ अँध्यारो। 

 आँख बंद कोरि द्योखण 
अंधा जनु द्योखण नि। 

 कै डाळा छैल मा 
कै सड़का किनारा घिमसाण घ्याळा बीच 
कुर्सी बुणदो एक अंधा 
दुन्यां दगड़ सबसे जादा पिरेम करदूं 
सु झफ्फक्वळि मा कुछ दुन्यां तैं स्पर्श करदूं 
अर 
भौत दुन्यां तैं स्पर्श कन चांन्दो। 

@ विनोद कुमार शुक्ल 
Anuwad :  बलबीर राणा 'अडिग'